विकास ||Development
विकास(Development)
सामाजिक विकास, विकास की अवधारणा का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पहलू है। विकास एक सतत एवं परिवर्तन की प्रक्रिया है। विकास सामाजिक संरचना के प्रत्येक पहलू में होता है चाहे वह सामाजिक हो या आर्थिक, धार्मिक हो या फिर सांस्कृतिक । सामाजिक विकास संरचना के सामाजिक पक्ष से सम्बन्धित है। इस रूप में सामाजिक विकास की अवधारणा महत्त्वपूर्ण होने के साथ-साथ व्यापक भी हो जाती है। यही कारण है कि समाजशास्त्रीय कृतियों में विकास सम्बन्धी विवेचन में सर्वाधिक उल्लेख सामाजिक विकास का ही मिलता है।
सामाजिक विकास का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Social Development)
यद्यपि पूरे (W.E. Moore: Social Change) और पारसन्स (Talcott Parsons: Structure and Process in Modern Societies) जैसे समाजशास्त्रियों ने भी अपनी कृतियों में सामाजिक विकास की अवधारणा का उल्लेख किया है। किन्तु सामाजिक विकास पर सबसे महत्त्वपूर्ण विचार हॉबहाऊस (L.T. Hobbhose, Social Development) में है। हॉबहाऊस ने साभाजिक विकास का अर्थ मानव मस्तिष्क के विकास से लगाया है, जिससे मनुष्य का मानसिक विकास होता है और अन्ततः सामाजिक विकास होता है।
सामाजिक विकास की प्रमुख परिभाषाएँ
- हॉबहाऊस - "विकास से मेरा अभिप्राय किसी भी प्रकार की प्रगति से है, जिससे कि मनुष्य सम्बन्धित है।"
- किम- "सामाजिक विकास का अर्थ उन उद्देश्यों को प्राप्त करने से है जिनमें समाज के अभाव एवं अकेलेपन का जीवन व्यतीत कर रहे अधिकांश व्यक्ति उपलब्ध सामाजिक संसाधनों में से अपने हिस्से की माँग कर सकें।"
- वार्नर- "समाज में रहने वाले व्यक्तियों के जीवन स्तर में वृद्धि ही सामाजिक विकास है।"
उपर्युक्त परिभाषाएँ सामाजिक विकास के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं। वार्नर ने व्यक्तियों के जीवन स्तर में वृद्धि अर्थात् सुधार को सामाजिक विकास माना है तो किम ने और भी स्पष्ट व्याख्या प्रस्तुत करते हुए इंगित किया है कि समाज के सुविधाविहीन वर्गों का विकास अर्थात् संतुलित विकास ही सामाजिक विकास है।
सामाजिक विकास की विशेषताएँ
(Characteristics of Social Development)
सामाजिक विकास मनुष्य के जीवन स्तर में वृद्धि से सम्बन्धित है अर्थात् यह मानव जीवन का निर्माण करने वाले सभी पहलुओं में सम्बन्धित है। सामाजिक विकास में सामाजिक सम्बन्ध परिवर्तित हो जाते हैं तथा समाजों की सरल प्रकृति जटिल हो जाती है। सामाजिक विकास निरन्तर एवं एक निश्चित दिशा में होता है। संक्षेप में सामाजिक विकास की विशेषताओं को प्रस्तुत करना आवश्यक है-
(1) सामाजिक विकास के अन्तर्गत समाज के सभी वर्गों को समानता के स्तर पर लाने का प्रयत्न किया जाता है।
(2) सामाजिक विकास मानव जीवन के सभी पहलुओं में सुधार से सम्बन्धित है।
(3) इसमें परिवर्तन समाज में हो रही प्रगति के अनुरूप होता है।
(4) सामाजिक मूल्यों एवं आदर्शों में परिवर्तन आ जाता है। यह परिवर्तन इनके प्रभाव में कमी के रूप में होता है।
(5) समाज में श्रम विभाजन में वृद्धि हो जाती है।
(6) सामाजिक विकास के लिये सार्थक नीति नियोजन की आवश्यकता पड़ती है।
(7) सामाजिक संरचना की निर्मायक इकाईयों की पारस्परिक अन्तर्निर्भरता में वृद्धि होती है।
(8) सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि होने लगती है अर्थात् सामाजिक व्यवस्था में जन्मजात योग्यता के स्थान पर मनुष्य को उसके कार्य-कौशल के आधार पर पहचाना जाता है।
(9) समाज में शिक्षा के स्तर में वृद्धि होती है।
(10) सामाजिक विकास में वृद्धि के साथ-साथ मनुष्यों की स्वतन्त्रता में भी वृद्धि होने लगती है तथा स्वविवेक से निर्णय लेने के अधिकार बढ़ जाते हैं।
(11) समाज में सहयोग की भावना में तीव्र वृद्धि होने लगती है।
(12) सामाजिक विकास सम्पूर्ण समाज के समग्र विकास से जुड़ी अवधारणा है। अतः इसका कार्यक्षेत्र अत्यन्त व्यापक होता है।
सामाजिक विकास के आयाम
(Dimension of Social Development)
अब समाजशास्त्री सामाजिक विकास के आयाम में निम्नलिखित बातों को सम्मिलित करते हैं-
(1) आम जनता की रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मौलिक आवश्यकताओं की समुचित पूर्ति।
(2) शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उत्तम स्तर, को बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक आहार, प्रदूषण रहित वातावरण, चिकित्सा आदि की पर्याप्त सुविधाएँ।
(3) रोजगार के पर्याप्त अवसर तथा रहन-सहन का ऊँचा स्तर, योग्यता व कार्य-कुशलता के आधार पर न कि जाति, प्रजाति, धर्म या सम्प्रदाय के आधार पर
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